माफ करना, माफ करना, कहीं तो एक सीमा होगी; अपराधियों की माफी पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी – supreme court forgiving nature premature release create problems life imprisonment
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में कई मामले सजा कम करने के साथ ही माफ करने के आते हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसे ही मामले का जिक्र जस्टिस दीपांकर दत्ता ने किया। माफ भी करना आखिर कब तक। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की कोर्ट की प्रवृति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि माफ करना, माफ करना, माफ करना—कहीं तो एक सीमा तय करनी ही होगी। समय बदल गया है। हमारे माफ करने वाले स्वभाव की वजह से ही भारत को इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इस अदालत ने एक ऐसे मामले में मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था, जिसमें पिता ने अपनी बड़ी बेटी का रेप करके उसकी हत्या कर दी थी। मां की गवाही के आधार पर उसे उम्रकैद की सजा हुई और वह जेल चला गया। कुछ साल बाद पिता पैरोल पर बाहर आया और उसने अपनी छोटी बेटी के सामने मां की हत्या कर दी।
छोटी बेटी की गवाही पर उसे मौत की सजा सुनाई गई। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, यह कहते हुए कि उसने छोटी बच्ची की हत्या नहीं की थी। इसलिए हम कहते हैं कि हमारे माफ करने वाले स्वभाव का कहीं तो अंत होना चाहिए। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने एक उम्रकैद की सजा पाए कैदी की समय से पहले रिहाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।
इस कैदी की दया याचिका पर फैसला लेने में बहुत देरी हुई थी, जिसके बाद उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि बार-बार माफ करने की प्रवृति ने देश को इस स्थिति में पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि जब बात सुप्रीम कोर्ट की हो तो सवाल और गंभीर हो जाता है। कहीं न कहीं एक लकीर खींचनी होगी।
लेखक के बारे मेंपंकज सिंहपंकज सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का 19 साल का अनुभव है। पंकज सिंह ने साल 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। अभी वह सेंट्रल टीम में नेशनल और दिल्ली की खबरों पर बारीक नजर रखते हैं साथ ही शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह आज तक डिजिटल में शिफ्ट हेड की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने दिल्ली, यूपी समेत दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनावों का कवरेज किया है। रिपोर्टिंग के दौरान कई वर्षों तक दिल्ली सरकार कवर किया है। देश के राजनीतिक घटनाक्रम पर विश्लेषण करना पंकज सिंह की प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति की खबरों पर अच्छी पकड़ के साथ करंट अफेयर्स और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अच्छा खासा अनुभव है।
पत्रकारिता अनुभव: प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 19 साल से कार्यरत
भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद अलग-अलग संस्थानों में काम किया। करियर की शुरुआत हिंदी डेली आज समाज (इंडिया न्यूज ग्रुप) से हुई। अलग-अलग बीट पर रिपोर्टिंग करते हुए दिल्ली सरकार कई वर्षों तक कवर किया। इस दौरान कई स्पेशल स्टोरी पर काम किया जिसे फ्रंट पेज पर जगह मिली। ETV भारत में यूपी डेस्क पर बतौर शिफ्ट हेड काम किया। इसके बाद आज तक डिजिटल में शिफ्ट इंचार्ज की भूमिका में रहे। आज तक के बाद एनबीटी के साथ सफर जारी है।… और पढ़ें
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