धड़ाम हुए प्याज के दाम… नासिक और अलवर से आ रहा बंपर स्टॉक, जानिए मंडी में अब कितनी हो गई कीमत?


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्याज की मंडियों में कीमतों का रुख अब बदलने लगा है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से नई फसल आने के चलते पिछले दस दिनों में थोक भाव में 20 प्रतिशत की गिरावट पहले ही आ चुकी है।

नासिक और अलवर का प्याज भी करीब दो सप्ताह में आने ही वाला है। ऐसे में नवंबर से पहले प्याज का भाव टूटकर दो महीने पहले की स्थिति में आ जाएगी।

जाहिर है आने वाले सप्ताहों में बाजार की दिशा इस बात से तय होगी कि नई फसल कितनी तेजी से मंडियों तक पहुंचती है और खुदरा विक्रेता घटे हुए थोक भाव का लाभ ग्राहकों तक कितनी जल्दी पहुंचाते हैं।

प्याज के लिए मशहूर महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में एक अक्टूबर को प्याज का भाव 4,450 रुपये प्रति क्विंटल था, जो दस अक्टूबर को घटकर 3,700 रुपये से नीचे आ गया।

हालांकि, यह भी सच है कि मंडियों में आई इस नरमी का लाभ खुदरा बाजार में उसी अनुपात में दिखाई नहीं दे रहा है। खुदरा बाजार में प्याज अब भी 70 रुपये प्रति किलो से ज्यादा भाव में बिक रहा है।

जाहिर है, प्याज की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही सवाल केवल कीमतों में गिरावट का नहीं, बल्कि यह है कि मंडी से खुदरा उपभोक्ता तक राहत कैसे और कबतक पहुंच सकता है।

कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से खरीफ प्याज की बढ़ती आवक है। नई फसल उपलब्ध होने से उत्तर भारत के खरीदारों की महाराष्ट्र के पुराने प्याज पर निर्भरता कम हुई है। निर्यातक भी नई फसल को तरजीह दे रहे हैं, जिससे मार्च-अप्रैल में काटकर भंडारित किए गए प्याज की मांग पर दबाव पड़ा है।

राजस्थान से इस महीने के अंत तक नई फसल आने और महाराष्ट्र में नवंबर से कटाई शुरू होने की उम्मीद है।उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने देश के 126 शहरों में पिछले दो सप्ताह के दौरान खुदरा कीमतों में एक से 21 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की है। इससे संकेत मिलता है कि राहत कई बाजारों तक पहुंची है, लेकिन इसकी मात्रा अलग-अलग है।

सरकार ने बफर स्टाक से प्याज की आपूर्ति विभिन्न बड़े शहरों तक बढ़ाई है। आठ कांदा एक्सप्रेस और 467 ट्रकों के जरिये दो लाख क्विंटल से अधिक प्याज बाजार में पहुंचाने की जानकारी दी गई है। अधिक खपत वाले केंद्रों तक आपूर्ति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रेल रैक चलाने की भी योजना है।

मौजूदा गिरावट में नई फसल की आवक महत्वपूर्ण है। इसलिए केवल सरकारी भंडार से प्याज निकालना कीमतों में स्थायी राहत की गारंटी नहीं है। जरूरत के मुताबिक आपूर्ति बढ़ाना जरूरी है, लेकिन नई फसल आने के समय भंडारित प्याज की अधिक बिक्री से किसानों के भाव पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ सकता है।



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