बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। मार्केट कैपिटल के हिसाब से भारत के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक की एक इंटरनल जांच में ऐसे सबूत मिले हैं कि दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बाहरी लोगों को गोपनीय बिजनेस स्ट्रेटजी और मार्केट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक की है। ये अधिकारी बैंक के कुछ अहम बिजनेस और कामकाज की देखरेख करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी लीक होने की आशंका हुई, जिसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की और इन अधिकारियों की पहचान की। बैंक अभी भी यह जांच कर रहा है कि क्या लीक हुई जानकारी का गलत इस्तेमाल किया गया है।
बैंक के लिए नाजुक समय!
रिपोर्ट्स के मुताबिक HDFC बैंक के एक प्रवक्ता ने आंतरिक समीक्षा की बात तो मानी, लेकिन इसके नतीजों या इसमें शामिल अधिकारियों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की। यह समीक्षा HDFC बैंक के लिए एक नाजुक समय पर हो रही है। लगभग 115 बिलियन डॉलर की मार्केट वैल्यू वाले इस बैंक ने पिछले तीन दशकों में कंजर्वेटिव मैनेजमेंट, मजबूत इंटरनल कंट्रोल्स और लगातार मुनाफा कमाने के जरिए अपनी एक खास साख बनाई है।
शेयर में आई गिरावट
बोर्डरूम विवादों और मैनेजमेंट के कुछ लोगों के इस्तीफा देने के बाद, बैंक अब अपने पहले बाहरी चीफ एग्जीक्यूटिव को लाने की तैयारी कर रहा है। इस बीच इस साल बैंक के शेयर में लगभग 28% की गिरावट आई है। बताया जा रहा है कि इस जांच और इसके नतीजों की जानकारी इस साल की शुरुआत में ही सीनियर मैनेजमेंट और बोर्ड के कुछ सदस्यों को दे दी गई थी।
दोनों अधिकारियों को भी इन नतीजों के बारे में आधिकारिक तौर पर बता दिया गया है, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि उनके खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इन नतीजों से अनूप बागची के सामने चुनौतियां और बढ़ गई हैं। ICICI ग्रुप से जुड़े रहे अनुभवी अनूप बागची 27 अक्टूबर को HDFC बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव का पद संभालने वाले हैं।
अतानु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दिया
हाल के महीनों में, HDFC के भीतर चल रहे मतभेद सबके सामने आ गए हैं। मार्च में, तत्कालीन चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण बैंक के कुछ तौर-तरीकों और अपने व्यक्तिगत मूल्यों के बीच मतभेद को बताया।
हालांकि बाद में, बैंक द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र कानूनी रिव्यू में कहा गया कि चक्रवर्ती की चिंताएं सही साबित नहीं हुईं। वहीं शशीधर जगदीशन, जो अभी चीफ एग्जीक्यूटिव हैं, ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए कहा कि वे अगला कार्यकाल नहीं लेंगे। इसके बाद ही बागची की नियुक्ति हुई।














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