एससी-एसटी आरक्षण पर एनडीए की दो पार्टियों में घमासान छिड़ा हुआ है। लोजपा-आर प्रमुख चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी का इस्तीफा मांगा, तो उनके बेटे संतोष सुमन मांझी ने चिराग से पहले इस्तीफा देने को कह दिया। संतोष ने कहा कि क्रीमी लेयर और सब-कोटा अलग-अलग कॉन्सेप्ट हैं।
बिहार सरकार में मंत्री और हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष मांझी ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को अपना छोटा भाई बताया और कहा कि पहले वह पद से इस्तीफा दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि कोटा के अंदर कोटा (सब-कोटा) लागू करने की बात कर रहे हैं। संतोष ने कहा कि क्रीमी लेयर और कोटा के अंदर कोटा का कॉन्सेप्ट दोनों बहुत अलग है। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भी अपने कैबिनेट सहयोगी पर पलटवार करते हुए कहा कि चिराग पासवान इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं, तो पहले खुद अपना मंत्री पद छोड़ें। इससे पहले चिराग ने मांझी और उनके बेटे का इस्तीफा मांगा था।
मंत्री संतोष सुमन ने शनिवार को 735 शब्दों के एक लंबे सोशल मीडिया पोस्ट में लोजपा (रामविलास) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जहां तक इस्तीफे का सवाल है, हम तैयार हैं। मेरे छोटे भाई की पार्टी बड़ी है, उनके पास हमसे अधिक संख्याबल है और राजनीतिक रूप से तीसरी पीढ़ी भी है। तो शुरुआत वही करें। वे इस्तीफा देकर सामने आएं, हम भी उनके साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं।”
संतोष बोले- मैंने क्रीमी लेयर की बात की ही नहीं
उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कहा कि चिराग पासवान ने उनकी बात को ठीक से समझा नहीं। उन्होंने अपने बयान में कहीं भी क्रीमी लेयर की बात नहीं की थी। संतोष ने कहा, “मैंने ना SC/ST आरक्षण समाप्त करने की बात कही है और ना ही क्रीमी लेयर के आधार पर किसी को आरक्षण से बाहर करने की बात कही है। कोटे में कोटा और क्रीमी लेयर—दोनों पूरब और पश्चिम हैं। दोनों को एक साथ मिलाकर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है। यदि क्रीमी लेयर की बात आएगी तो उसके अपने अलग परिणाम होंगे, लेकिन हम जिस विषय की बात कर रहे हैं, वह SC/ST के भीतर वर्गीकरण और कोटे में कोटा है।”
जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा कि मुसहर, भुइयां, हलखोर, नट, डोम जैसे अनेक समुदाय आज भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से बेहद पिछड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन जाति के लोगों को अपने ही वर्ग (दलित) के भीतर सामाजिक भेदभाव और छुआछूत का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वह दलित आरक्षण खत्म करने के समर्थन में नहीं हैं। बल्कि यह चाहते हैं कि इस वर्ग में जो जातियां कतार में पीछे खड़ी हैं, उनके लिए थोड़ा हिस्सा सुनिश्चित किया जाए। इस विषय पर डर, आशंका और भ्रम की भाषा के बजाय संवाद और तथ्यों की भाषा में बात होनी चाहिए। इस विषय पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। किसी के अधिकार और हिस्सेदारी की मांग को गलत ठहराना उचित नहीं है।
संतोष मांझी की चिराग पासवान को नसीहत
संतोष सुमन ने चिराग पासवान को नसीहत दी है कि एससी-एसटी समाज के भीतर किसी को सामंती सोच के साथ बात नहीं करनी चाहिए। राजनीतिक मंच और बयानबाजी से बाहर निकलकर गरीबों की झोपड़ियों और मलीन बस्तियों में जाना चाहिए। उन्हें देखना चाहिए कि वहां सरकारी योजनाओं, शिक्षा, अवसर और आरक्षण का फायदा आज भी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है।
जीतनराम मांझी क्या बोले?
वहीं, हम सुप्रीमो एवं केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भी चिराग पासवान पर जमकर पलटवार किया। मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी संतोष आरक्षण तोड़ने या हटाने की बात नहीं कर रही है। उनके बेटे संतोष की बात को चिराग पासवान समझ नहीं रहे हैं। चिराग इस्तीफा मांग रहे हैं तो पहले उन्हें खुद इस्तीफा देना चाहिए।
चिराग पासवान ने क्या कहा?
इससे पहले, लोजपा-आर के मुखिया चिराग पासवान ने पटना में शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा था कि आरक्षण में क्रीमी लेयर, सब-कोटा की बात करने वाली हम पार्टी के सुप्रीमो जीतनराम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन, दोनों को मंत्री पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
एनडीए में तकरार
चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी दलित आरक्षण के सब-कैटगराइजेशन के सख्त खिलाफ है। उन्होंने इसे संविधान के खिलाफ बताया और कहा कि इससे आरक्षण खत्म हो जाएगा। चिराग और मांझी दोनों ही नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं। एनडीए के दो प्रमुख नेताओं के बीच आरक्षण के मुद्दे पर तकरार से पटना से दिल्ली तक का सियासी पारा गर्माया हुआ है।














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