केंद्र सरकार ने लद्दाख को एक बड़ा ऑफर दिया है। यह है अनुच्छेद 371(K) जैसा संवैधानिक प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव। हालांकि, इसका मसौदा तैयार नहीं हुआ है, मगर बातचीत शुरू हो चुकी है।

गृह मंत्रालय से मुलाकात में सोनम वांगचुक भी थे
रिपोर्ट के अनुसार, पिछली बातचीत के महीनों बाद हुई इस बैठक में लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सदस्यों वाली सब-कमेटी ने गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों से मुलाकात की। इनमें एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल थे। यह बैठक 22 मई और 3 जुलाई को हुई बैठकों में बनी ‘सैद्धांतिक सहमति’ को आगे बढ़ाने के लिए थी।
दो अहम बैठकों में लद्दाख में लोकतंत्र बहाल करने और अनुच्छेद 371 के तहत विशेष प्रावधान के जरिए संवैधानिक सुरक्षा देने पर चर्चा हुई थी माना जा रहा है कि प्रस्तावित प्रावधान लद्दाख में एक चुनी हुई गवर्निंग बॉडी और स्थानीय प्रशासनिक स्वायत्तता स्थापित करने के लिए है।
रिपोर्ट
उन दो बैठकों के बाद से तब से बातचीत रुकी हुई है क्योंकि लद्दाख के प्रतिनिधियों ने ज्यादा लोकतांत्रिक नियंत्रण और पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ मामले वापस लेने की मांग की थी।
गृह मंत्रालय बोला-ये शक्तियां होंगी
बुधवार की बैठक में शामिल लोगों के अनुसार, MHA ने कहा कि UT-स्तर की जिस गवर्निंग बॉडी (प्रशासनिक निकाय) की मांग दोनों समूहों ने की थी, उसे सीधे चुनाव से चुना जाएगा। इस निकाय के पास जमीन, संस्कृति और भाषा, जंगल, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत UT के लिए आरक्षित अन्य विषयों पर कानून बनाने की शक्तियां होंगी।
इस निकाय के पास जमीन, संस्कृति और भाषा, जंगल, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत UT के लिए आरक्षित अन्य विषयों पर कानून बनाने की शक्तियां होंगी।
रिपोर्ट
क्या है अनुच्छेद 240
- अनुच्छेद 240 भारत के राष्ट्रपति को कुछ खास केंद्र शासित प्रदेशों में शांति, तरक्की और अच्छे प्रशासन के लिए कानून और नियम बनाने की शक्ति देता है।
- लद्दाख ने प्रस्तावित चुनी हुई संस्था के लिए कार्यकारी, बजटीय, योजना और वित्तीय शक्तियां भी मांगी हैं।
सोनम वांगचुक बोले-विधानसभा का हक नौकरशाही से ऊपर हो
हालांकि, बैठक में शामिल LAB और KDA के प्रतिनिधियों ने कहा कि पुडुचेरी UT की तरह कानून-व्यवस्था समेत उन सभी क्षेत्रों के बारे में स्पष्टता की कमी है, जो सही प्रशासन के लिए जरूरी हैं।
बैठक के बाद वांगचुक ने कहा कि (प्रस्तावित) विधानसभा का अधिकार नौकरशाही से ऊपर होना चाहिए, और हमने पुलिस तथा कानून-व्यवस्था पर भी नियंत्रण की मांग की है।
प्रस्तावित विधानसभा का अधिकार नौकरशाही से ऊपर होना चाहिए और हमने पुलिस और कानून-व्यवस्था पर भी नियंत्रण की मांग की है।
सोनम वांगचुक
अगर बदलाव जारी रहे तो फिर से आंदोलन: वांगचुक
- वांगचुक ने कहा, इस बारे में उन्होंने बस इतना कहा है कि वे अक्टूबर में इस पर चर्चा करेंगे। हालांकि, यह भी नहीं कहा जा सकता कि बैठक सफल रही या असफल।
- लद्दाख ने केंद्र शासित प्रदेश (UT) के प्रशासनिक ढांचे में संरचनात्मक बदलावों को लेकर भी चिंता जताई है। वांगचुक ने कहा, अगर ये बदलाव जारी रहे, तो हमें फिर से आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
- गृह मंत्रालय (MHA) ने एक नए प्रावधान अनुच्छेद 371(K) के तहत कुछ प्रावधानों का प्रस्ताव दिया है, वहीं KDA के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली ने कहा कि चर्चा बिना किसी ड्राफ्ट के हुई और जब तक इन प्रावधानों की विस्तृत जानकारी वाला ड्राफ्ट पेश नहीं किया जाता, तब तक इससे उप-समिति के सदस्यों और लद्दाख के लोगों का भरोसा नहीं बनता।
- MHA ने सितंबर 2025 के आंदोलन में जान गंवाने वालों और घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे के पैकेज का वादा भी किया है। LAB और KDA ने मांग की कि विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सभी मामले तुरंत वापस लिए जाएं, न कि चरणों में। कुछ प्रतिनिधियों ने बताया कि MHA ने कहा है कि इस पर विचार किया जा रहा है।
राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा की मांग 2019 से ही
लद्दाख में ज्यादा राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा की मांग अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के समय से ही उठ रही है। शुरुआत में खासकर लेह में लद्दाख को अलग केंद्र-शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर काफी उत्साह था। बौद्ध-बहुल लेह जिला लंबे समय से केंद्र-शासित प्रदेश का दर्जा मांग रहा था। उनका तर्क था कि पहले की जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें नजरअंदाज किया था। लेकिन जब यह साफ हो गया कि जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश में तो विधानसभा होगी, पर लद्दाख में नहीं, तो यह उत्साह कम हो गया।
विशेष प्रावधानों से कई राज्यों को संरक्षण
- अनुच्छेद 371-A के तहत नागाओं के धार्मिक या सामाजिक रीति-रिवाजों, पारंपरिक कानूनों और प्रक्रियाओं, जमीन और संसाधनों के मालिकाना हक और उनके हस्तांतरण से जुड़े संसद के कानून नगालैंड में तब तक अपने-आप लागू नहीं होते, जब तक कि राज्य विधानसभा इसके लिए सहमत न हो। अनुच्छेद 371-G के तहत मिजोरम को भी इसी तरह का संरक्षण दिया गया है।
- अनुच्छेद 371-B और 371-C में असम और मणिपुर की विधानसभाओं के भीतर विशेष समितियों का प्रावधान है, जबकि अनुच्छेद 371-F में सिक्किम विधानसभा में प्रतिनिधित्व के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अरुणाचल प्रदेश और गोवा के लिए भी विशेष प्रावधान मौजूद हैं।
- अगर लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) लाया जाता है, तो यह इस पैटर्न से एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि लद्दाख एक केंद्र-शासित प्रदेश है, राज्य नहीं।
अनुच्छेद 371(K) छठी अनुसूची से किस तरह अलग होगा?
- छठी अनुसूची के तहत संविधान में तय अधिकारों वाली स्वायत्त जिला-स्तरीय संस्थाएं बनाई जाती हैं। इसके उलट, प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) का मकसद केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर सीधे चुने गए एक ऐसे गवर्निंग बॉडी (प्रशासनिक निकाय) का गठन करना लगता है, जिसके पास कुछ खास विषयों पर कानून बनाने का अधिकार हो।
- इससे लद्दाख को एक अलग संवैधानिक व्यवस्था मिलेगी, न कि सिर्फ़ केंद्र शासित प्रदेश में छठी अनुसूची लागू की जाएगी। असल फ़र्क ड्राफ़्ट की भाषा पर निर्भर करेगा।
- सबसे अहम अनसुलझे सवाल ये हैं कि क्या चुनी हुई संस्था के पास कार्यकारी अधिकार, बजट और प्लानिंग पर नियंत्रण और पुलिस व कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकार होंगे। जब तक ये बातें तय नहीं हो जातीं, तब तक यह साफ नहीं है कि प्रस्तावित संस्था असल में कितने अधिकारों का इस्तेमाल कर पाएगी।














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