केंद्र सरकार ने लद्दाख को एक बड़ा ऑफर दिया है। यह है अनुच्छेद 371(K) जैसा संवैधानिक प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव। हालांकि, इसका मसौदा तैयार नहीं हुआ है, मगर बातचीत शुरू हो चुकी है।

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लद्दाख को अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए ‘अनुच्छेद 371(K)’ जैसा संवैधानिक प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से ये बात सामने आई है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली में बुधवार को इसे लेकर लद्दाख सब-कमेटी और गृह मंत्रालय के बीच बैठक हुई। हालांकि, प्रतिनिधियों का कहना है कि अभी इसका कोई ड्राफ्ट तैयार नहीं हुआ है और बातचीत जारी रहेगी। यह बातचीत तब हो रही है, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आ रहे हैं। ये दौरा ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर हो रहा है। ऐसे में इस दौरे की टाइमिंग के बीच लद्दाख को लेकर यह बड़ी पहल पाकिस्तान की भी टेंशन बढ़ा सकती है।

गृह मंत्रालय से मुलाकात में सोनम वांगचुक भी थे

रिपोर्ट के अनुसार, पिछली बातचीत के महीनों बाद हुई इस बैठक में लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सदस्यों वाली सब-कमेटी ने गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों से मुलाकात की। इनमें एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल थे। यह बैठक 22 मई और 3 जुलाई को हुई बैठकों में बनी ‘सैद्धांतिक सहमति’ को आगे बढ़ाने के लिए थी।

दो अहम बैठकों में लद्दाख में लोकतंत्र बहाल करने और अनुच्छेद 371 के तहत विशेष प्रावधान के जरिए संवैधानिक सुरक्षा देने पर चर्चा हुई थी माना जा रहा है कि प्रस्तावित प्रावधान लद्दाख में एक चुनी हुई गवर्निंग बॉडी और स्थानीय प्रशासनिक स्वायत्तता स्थापित करने के लिए है।

रिपोर्ट

उन दो बैठकों के बाद से तब से बातचीत रुकी हुई है क्योंकि लद्दाख के प्रतिनिधियों ने ज्यादा लोकतांत्रिक नियंत्रण और पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ मामले वापस लेने की मांग की थी।

गृह मंत्रालय बोला-ये शक्तियां होंगी

बुधवार की बैठक में शामिल लोगों के अनुसार, MHA ने कहा कि UT-स्तर की जिस गवर्निंग बॉडी (प्रशासनिक निकाय) की मांग दोनों समूहों ने की थी, उसे सीधे चुनाव से चुना जाएगा। इस निकाय के पास जमीन, संस्कृति और भाषा, जंगल, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत UT के लिए आरक्षित अन्य विषयों पर कानून बनाने की शक्तियां होंगी।

इस निकाय के पास जमीन, संस्कृति और भाषा, जंगल, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत UT के लिए आरक्षित अन्य विषयों पर कानून बनाने की शक्तियां होंगी।

रिपोर्ट

क्या है अनुच्छेद 240

  • अनुच्छेद 240 भारत के राष्ट्रपति को कुछ खास केंद्र शासित प्रदेशों में शांति, तरक्की और अच्छे प्रशासन के लिए कानून और नियम बनाने की शक्ति देता है।
  • लद्दाख ने प्रस्तावित चुनी हुई संस्था के लिए कार्यकारी, बजटीय, योजना और वित्तीय शक्तियां भी मांगी हैं।

सोनम वांगचुक बोले-विधानसभा का हक नौकरशाही से ऊपर हो

हालांकि, बैठक में शामिल LAB और KDA के प्रतिनिधियों ने कहा कि पुडुचेरी UT की तरह कानून-व्यवस्था समेत उन सभी क्षेत्रों के बारे में स्पष्टता की कमी है, जो सही प्रशासन के लिए जरूरी हैं।

बैठक के बाद वांगचुक ने कहा कि (प्रस्तावित) विधानसभा का अधिकार नौकरशाही से ऊपर होना चाहिए, और हमने पुलिस तथा कानून-व्यवस्था पर भी नियंत्रण की मांग की है।

प्रस्तावित विधानसभा का अधिकार नौकरशाही से ऊपर होना चाहिए और हमने पुलिस और कानून-व्यवस्था पर भी नियंत्रण की मांग की है।

सोनम वांगचुक

अगर बदलाव जारी रहे तो फिर से आंदोलन: वांगचुक

  • वांगचुक ने कहा, इस बारे में उन्होंने बस इतना कहा है कि वे अक्टूबर में इस पर चर्चा करेंगे। हालांकि, यह भी नहीं कहा जा सकता कि बैठक सफल रही या असफल।
  • लद्दाख ने केंद्र शासित प्रदेश (UT) के प्रशासनिक ढांचे में संरचनात्मक बदलावों को लेकर भी चिंता जताई है। वांगचुक ने कहा, अगर ये बदलाव जारी रहे, तो हमें फिर से आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
  • गृह मंत्रालय (MHA) ने एक नए प्रावधान अनुच्छेद 371(K) के तहत कुछ प्रावधानों का प्रस्ताव दिया है, वहीं KDA के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली ने कहा कि चर्चा बिना किसी ड्राफ्ट के हुई और जब तक इन प्रावधानों की विस्तृत जानकारी वाला ड्राफ्ट पेश नहीं किया जाता, तब तक इससे उप-समिति के सदस्यों और लद्दाख के लोगों का भरोसा नहीं बनता।
  • MHA ने सितंबर 2025 के आंदोलन में जान गंवाने वालों और घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे के पैकेज का वादा भी किया है। LAB और KDA ने मांग की कि विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सभी मामले तुरंत वापस लिए जाएं, न कि चरणों में। कुछ प्रतिनिधियों ने बताया कि MHA ने कहा है कि इस पर विचार किया जा रहा है।

राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा की मांग 2019 से ही

लद्दाख में ज्यादा राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा की मांग अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के समय से ही उठ रही है। शुरुआत में खासकर लेह में लद्दाख को अलग केंद्र-शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर काफी उत्साह था। बौद्ध-बहुल लेह जिला लंबे समय से केंद्र-शासित प्रदेश का दर्जा मांग रहा था। उनका तर्क था कि पहले की जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें नजरअंदाज किया था। लेकिन जब यह साफ हो गया कि जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश में तो विधानसभा होगी, पर लद्दाख में नहीं, तो यह उत्साह कम हो गया।

विशेष प्रावधानों से कई राज्यों को संरक्षण

  • अनुच्छेद 371-A के तहत नागाओं के धार्मिक या सामाजिक रीति-रिवाजों, पारंपरिक कानूनों और प्रक्रियाओं, जमीन और संसाधनों के मालिकाना हक और उनके हस्तांतरण से जुड़े संसद के कानून नगालैंड में तब तक अपने-आप लागू नहीं होते, जब तक कि राज्य विधानसभा इसके लिए सहमत न हो। अनुच्छेद 371-G के तहत मिजोरम को भी इसी तरह का संरक्षण दिया गया है।
  • अनुच्छेद 371-B और 371-C में असम और मणिपुर की विधानसभाओं के भीतर विशेष समितियों का प्रावधान है, जबकि अनुच्छेद 371-F में सिक्किम विधानसभा में प्रतिनिधित्व के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अरुणाचल प्रदेश और गोवा के लिए भी विशेष प्रावधान मौजूद हैं।
  • अगर लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) लाया जाता है, तो यह इस पैटर्न से एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि लद्दाख एक केंद्र-शासित प्रदेश है, राज्य नहीं।

अनुच्छेद 371(K) छठी अनुसूची से किस तरह अलग होगा?

  • छठी अनुसूची के तहत संविधान में तय अधिकारों वाली स्वायत्त जिला-स्तरीय संस्थाएं बनाई जाती हैं। इसके उलट, प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) का मकसद केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर सीधे चुने गए एक ऐसे गवर्निंग बॉडी (प्रशासनिक निकाय) का गठन करना लगता है, जिसके पास कुछ खास विषयों पर कानून बनाने का अधिकार हो।
  • इससे लद्दाख को एक अलग संवैधानिक व्यवस्था मिलेगी, न कि सिर्फ़ केंद्र शासित प्रदेश में छठी अनुसूची लागू की जाएगी। असल फ़र्क ड्राफ़्ट की भाषा पर निर्भर करेगा।
  • सबसे अहम अनसुलझे सवाल ये हैं कि क्या चुनी हुई संस्था के पास कार्यकारी अधिकार, बजट और प्लानिंग पर नियंत्रण और पुलिस व कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकार होंगे। जब तक ये बातें तय नहीं हो जातीं, तब तक यह साफ नहीं है कि प्रस्तावित संस्था असल में कितने अधिकारों का इस्तेमाल कर पाएगी।
दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।और पढ़ें