जॉर्जिया मेलोनी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को क्यों कहा- ‘थैंक यू’


मोदी

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इमेज कैप्शन, शनिवार को पीएम मोदी दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे

दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (एसआरसीसी) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “वाह. भारत के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में से एक में जाकर और एक बार फिर सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी को ‘दिमाग़ी नक्सल’ कहना, किसी प्रधानमंत्री के सबसे शर्मनाक काम में से एक होना चाहिए. वह भी शिक्षक दिवस के दिन.”

पीएम मोदी ने 15 अगस्त के अपने भाषण का ज़िक्र करते हुए शनिवार को कहा, “होम्योपैथी का इलाज बीमारी को कुछ समय के लिए और उभार देता है. जैसे ही मैंने ये गोली दी, सारे दिमाग़ी नक्सल बाहर आने लगे. मगर जनता उनका असली रंग देख रही है.”

सौरव दास ने लिखा, “वह इस बारे में बात कर सकते थे कि एसआरसीसी के शिक्षकों को मेडिकल और चाइल्डकेयर लीव नहीं मिलने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन क्यों करना पड़ा. वह एसआरसीसी के छात्रों को जर्जर हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का वादा कर सकते थे. वह हाइपर-कॉम्पिटिशन के उस भारी दबाव को स्वीकार कर सकते थे, जिसका वे सामना कर रहे हैं.”

सौरव दास के मुताबिक़, “वह इस बारे में भी बात कर सकते थे कि एक दशक में क़रीब 1 लाख स्कूल बंद हो गए हैं. क़रीब 9 करोड़ युवा भारतीय बिना किसी नौकरी, शिक्षा या ट्रेनिंग के फंसे हुए हैं. स्कूल के 73% छात्र हायर सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने से पहले पढ़ाई छोड़ देते हैं. वह पिछले 12 साल में अपनी ही सरकार में शिक्षा बजट को आधा किए जाने पर भी जवाब दे सकते थे.”

सौरव दास ने आरोप लगाया, “इसके बजाय, प्रधानमंत्री ने शिक्षक दिवस का इस्तेमाल एक और राजनीतिक भाषण के लिए किया, जिसमें युवा भारतीयों की पूरी एक पीढ़ी को इसलिए बदनाम किया गया क्योंकि उनकी नज़र में उन्होंने माफ़ न करने वाला काम किया है- जो है सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना.”

इसके बजाय, उन्होंने “दिमाग़ी नक्सल” जैसी बकवास का सहारा लिया.

जब आपक ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ की डिग्री लेते हैं तो ऐसा ही होता है.

शनिवार को एसआरसीसी में हुए कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा था. उन्होंने अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज़ फूफा’ जैसे शब्दों का ज़िक्र किया था.



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