जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से हाई कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। पीठ ने कहा, ‘यह संदेश स्पष्ट और जोरदार तरीके से जाना चाहिए कि मेडिकल बिरादरी को छुआ नहीं जा सकता। वे लोगों की सेवा करते हैं और इस तरह उन पर हमला नहीं किया जा सकता।’
एक ही पार्टी से जुड़े दूसरे मामले का भी जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि म्हात्रे की घटना के बाद उसी राजनीतिक दल से जुड़ी ऐसी ही एक अन्य घटना भी सामने आई थी। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।म्हात्रे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि मामले में दो गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर की गवाही 3 अक्टूबर को होनी है। उन्होंने कहा कि मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है और इसमें कोई बाधा नहीं आ रही है।
इस पर पीठ ने कहा कि म्हात्रे के खिलाफ मौजूदा मामले समेत कुल 19 आपराधिक मामले दर्ज होने की बात भी सामने आती है। दवे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ये सभी मामले राजनीतिक कारणों से दर्ज किए गए थे और म्हात्रे इनमें से 18 मामलों में बरी हो चुके हैं।
हाई कोर्ट ने अगस्त में दी थी जमानत
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 7 अगस्त को म्हात्रे को जमानत देते हुए मुकदमे को फास्ट ट्रैक करने और समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार चार अन्य आरोपियों को भी जमानत दी थी। यह मामला 6 जुलाई को ठाणे के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। एक गर्भवती महिला के परिजनों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर इलाज में देरी का आरोप लगाया था। इसके बाद म्हात्रे और अन्य आरोपी अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों के साथ कथित तौर पर मारपीट की।
घटना के बाद डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय में आक्रोश फैल गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे को तेजी से आगे बढ़ाने के हाई कोर्ट के निर्देश पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए म्हात्रे को तीन दिन में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया















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