लोकसभा में 2-तिहाई बहुमत के कितने पास NDA? परिसीमन बिल के लिए फिर बैठ सकती है संसद, National Hindi News


इससे पहले संसद के मॉनसून सत्र को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। हालांकि उसे अब तक औपचारिक रूप से खत्म नहीं किया गया है। अब केंद्रीय मंत्री के बयान ने हलचल मचाई है।

मॉनसून सत्र स्थगित होने के कई दिनों बाद भी सत्र को औपचारिक रूप खत्म ना किए के बाद इसे लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लग रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक को पास कराने के लिए संसद की बैठक दोबारा बुलाने की तैयारी में है? सवाल यह भी है कि क्या अब सत्तारूढ़ NDA के पास बिल पास कराने के लिए जरूरी 2-तिहाई बहुमत का समर्थन मिल गया है?

इन सवालों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजीजू के एक बयान ने हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि तकनीकी रूप से सत्र अभी खत्म नहीं हुआ है और सरकार जब चाहे इसकी बैठक दोबारा बुला सकती है। किरन रिजीजू ने यह बातें इंडिया टुडे टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं। केंद्रीय मंत्री से जब पूछा गया कि क्या सरकार परिसीमन बिल जैसे मुद्दों के लिए कोई विशेष सत्र या दोबारा बैठक बुला सकती है, तो उन्होंने इसे खारिज नहीं किया।

क्या बोले किरन रिजीजू?

किरन रिजीजू ने इंटरव्यू मेंकहा, “यह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है। जब भी संसद को बुलाना होता है, सरकार फैसला करती है और राष्ट्रपति से सत्र बुलाने का अनुरोध करती है। जब तक सत्र आधिकारिक रूप से खत्म नहीं हुआ है, सत्र को दोबारा बुलाया जा सकता है।” वहीं जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या उनके बयान का मतलब संभावनाओं को खुला रखना समझा जाए, तो उन्होंने कहा, “आप इसके दोनों मतलब निकाल सकते हैं।”

वहीं सदन को बिना औपचारिक रूप से खत्म किए दोबारा बुलाने के सवाल पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “हम कुछ नया नहीं कर रहे हैं। 1952 के बाद से ऐसे अनगिनत मौके आए हैं जब संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित तो किया गया, लेकिन औपचारिक रूप से खत्म नहीं हुआ और बाद में उसी सत्र को फिर से बुला लिया गया।”

विपक्षी खेमे में टेंशन?

बता दें कि इससे पहले बीते 13 अगस्त को संसद के दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब कई दिन बीत जाने के बाद भी सरकार ने इसे औपचारिक रूप से समाप्त नहीं कराया। इस बात ने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल संसदीय नियमों के तहत अगर सत्र खत्म न हुआ हो, तो सरकार बिना किसी नई औपचारिक प्रक्रिया के बेहद कम समय के नोटिस पर दोबारा बैठक बुला सकती है। विपक्षी खेमे में यही चर्चा तेज है कि क्या सरकार परिसीमन बिल और दूसरे लंबित विधेयकों को सदन के पटल पर लाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल कर सकती है।

NDA के पास कितनी सीटें?

इससे पहले सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक को पास कराने की कोशिश की थी। संविधान संशोधन का प्रावधन होने की वजह से इस बिल को पास कराने के लिए 2-तिहाई बहुमत जरूरी था। हालांकि सरकार यह आंकड़ा नहीं जुटा पाई। विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। इसके बाद से लोकसभा में एनडीए की ताकत में काफी इजाफा हुआ है।

शिवसेना (UBT) के 7 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं और टीएमसी छोड़कर NCPI में शामिल हुए सभी 20 सांसदों ने भी एनडीए को समर्थन देने की बात कही है। अब NDA के पास 318 सांसदों का समर्थन है। इसके बावजूद बिल पास करने के लिए जरूरी 360 वोट का आंकड़ा दूर है। अब अटकलें हैं कि इस संकट से सरकार को डीएमके उबार सकती है। डीएमके फिलहाल कांग्रेस से नाराज है और वह INDIA गठबंधन का साथ छोड़ चुकी है। ऐसे में अगर लोकसभा में डीएमके के 22 सांसदों ने परिसीमन विधेयक पर सरकार का साथ दिया तो NDA 2-तिहाई बहुमत के पास पहुंच सकती है। हांलाकि इसे लेकर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया गया है और सिर्फ अकटलें लग रही हैं।



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