यूपी में किसान क्रेडिट कार्ड के बकाए के मामले में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 है। यूपी के किसानों पर कर्ज का बकाया कर्ज 1.40 लाख करोड़ रुपये के करीच पहुंच गया है।

5 साल में 16,900 करोड़ का बढ़ा केसीसी कर्ज
लोकसभा में वित्त मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2021-22 में उत्तर प्रदेश में केसीसी बकाया 1,23,076 करोड़ रुपये था। इसके बाद यह लगातार बढ़ते हुए 2022-23 में 1,28,123 करोड, 2023-24 में 1,38,621 करोड़ और 2024-25 में रेकॉर्ड 1,41,375 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, 2025-26 में इसमें मामूली गिरावट आई, लेकिन बकाया राशि अब भी 1.40 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर बनी हुई है। पांच वर्षों में राज्य का कुल बकाया करीब 16,900 करोड़ रुपये बढ़ा है।
KCC ऋण वाले शीर्ष 5 राज्य (करोड़ में)
| राज्य | 2025-26 | 2024-25 | 2023-24 |
| उत्तर प्रदेश | 1,39,986 | 1,41,375 | 1,38,621 |
| राजस्थान | 1,15,769 | 1,12,364 | 1,08,973 |
| मध्य प्रदेश | 87,391 | 88,732 | 84,523 |
| गुजरात | 81,322 | 77,441 | 71,132 |
| कर्नाटक | 67,398 | 67,542 | 62,794 |
क्यों बढ़ रहा कर्ज
विशेषज्ञों का मानना है कि बीज, उर्वरक, कीटनाशक, डीजल और कृषि मशीनरी पर बढ़ते खर्च के कारण किसान केसीसी का अधिक उपयोग कर रहे हैं। केसीसी किसानों को सस्ती दरों पर फसल ऋण उपलब्ध करवाता है, लेकिन बकाया ऋण का लगातार ऊंचा स्तर यह भी संकेत देता है कि खेती की लागत और आय के बीच संतुलन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
केसीसी अनुदान बढ़ना भी एक वजह
बजट 2025-26 में संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत केसीसी ऋण सीमा 3 लाख स्रूपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है। सरकार का तर्क है कि इससे किसानों को अधिक सस्ता संस्थागत ऋण मिलेगा और साहूकारों या अन्य गैर-संस्थागत स्रोतों पर निर्भरता घटेगी।
















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