डीप डिप्रेशन खत्म लेकिन MP के ऊपर बना लो-प्रेशर एरिया, अजीब मौसम का PAK कनेक्शन! – September rains India 2026 Western Disturbance Bay of Bengal deep depression low pressure area El Nino impact monsoon


भारत में सितंबर का महीना आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के वापसी का समय माना जाता है. इस समय बारिश धीरे-धीरे कम हो जानी चाहिए. लेकिन 2026 में सितंबर के अंतिम सप्ताह में देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और पहाड़ी एरियाों में लैंडस्लाइड जैसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं. 

बिहार से उत्तर प्रदेश तक बारिश, ओडिशा में बाढ़, उत्तराखंड में बर्फबारी और लैंडस्लाइड, नेपाल में एवलांच तथा चारधाम यात्रा का बाधित होना- ये सब एक साथ हो रहे हैं. क्या इसका कारण अल-नीनो है या बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन के बाद लो-प्रेशर एरिया ने पश्चिमी विक्षोभ को खींच लिया है. वैज्ञानिक दृष्टि से दोनों बातें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं.

यह भी पढ़ें: नेपाल में हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में एवलांच, 10 पर्वतारोही लापता

इस बारिश का तात्कालिक कारण बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी सिस्टम है. सितंबर के तीसरे सप्ताह में खाड़ी में एक लो-प्रेशर एरिया बना, जो धीरे-धीरे डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन में बदल गया. यह सिस्टम 23-24 सितंबर के आसपास आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट के पास लैंडफॉल कर गया. 

इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर दिशा में आगे बढ़ा और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के एरियाों में पहुंचकर कमजोर हो गया. मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम कमजोर होने के बावजूद नमी भरी हवाएं लाता रहा. इसका बची हुई ताकत की वजह से उत्तर प्रदेश के उत्तरी-मध्य भागों में लो-प्रेशर एरिया बना. 

September rains India 2026
मौसम विभाग की इस ताजा तस्वीर में आप देख सकते हैं कि पूरे देश से बादल गायब हैं. (Photo: IMD)

जब कोई डीप डिप्रेशन जमीन पर आता है तो वह आसपास की हवाओं को खींचता है. इस प्रक्रिया में बंगाल की खाड़ी से नमी उत्तर की ओर बढ़ी और पूर्वी तथा मध्य भारत में भारी बारिश हुई. ओडिशा में नदियां उफान पर आ गईं. बाढ़ जैसी स्थिति बनी. बिहार तथा उत्तर प्रदेश में भी कई जगहों पर असामान्य भारी वर्षा दर्ज की गई.

अल-नीनो का असर और मॉनसून का कॉम्प्लेक्स सिस्टम

अल-नीनो इस पूरे परिदृश्य में बड़ी भूमिका निभा रहा है. 2026 में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत से बहुत मजबूत अल-नीनो की स्थिति बनी हुई है. अल-नीनो आमतौर पर भारतीय मॉनसून को कमजोर बनाता है क्योंकि यह वायुमंडल के सर्कुलेशन को बदल देता है. मॉनसून की नमी कम कर देता है. 

यह भी पढ़ें: हिमालय के ग्लेशियर 65% तेजी से पिघल रहे हैं, करोड़ों लोगों की जान आफत में

इस साल पूरे देश में मॉनसून की कुल बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रही है. कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बने. लेकिन अल-नीनो हमेशा एकसमान प्रभाव नहीं डालता. बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन जैसे सिस्टम स्थानीय स्तर पर नमी बढ़ा सकते हैं. 

इस साल खाड़ी में कई डिप्रेशन बने, जिन्होंने पूर्वी और मध्य भारत को कुछ राहत दी. इस तरह अल-नीनो ने समग्र रूप से बारिश कम की, लेकिन स्थानीय मौसमी सिस्टम्स ने सितंबर के अंत में अचानक भारी बारिश ला दी. यही वजह है कि मॉनसून वापसी के समय भी कुछ इलाकों में तेज बारिश हो रही है.

September rains India 2026
लखनऊ का प्रेरणा स्थल पार्क भी पानी से भरा हुआ है. (Photo: PTI)

पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका- लो-प्रेशर एरिया से मिलकर तबाही

उत्तर भारत में हो रही बारिश का एक और महत्वपूर्ण कारण पश्चिमी विक्षोभ है. पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से पाकिस्तान होते हुए आने वाले पश्चिमी हवाओं के सिस्टम होते हैं जो सर्दियों में सक्रिय रहते हैं, लेकिन कभी-कभी सितंबर-अक्टूबर में भी एक्टिव हो जाते हैं. 

इस समय बंगाल की खाड़ी से आए लो-प्रेशर एरिया और पश्चिमी विक्षोभ के बीच परस्पर क्रिया हुई. लो-प्रेशर एरिया ने नमी भरी हवाओं को उत्तर की ओर खींचा, जबकि पश्चिमी विक्षोभ ने ऊपरी स्तर पर ठंडी हवाएं दीं. दोनों के मिलने से वातावरण अस्थिर हो गया और पहाड़ी एरियाों में भारी वर्षा तथा बर्फबारी की स्थिति बनी. 

यह भी पढ़ें: सैटेलाइट तस्वीर में देखिए देश में बंटा हुआ मौसम, जानिए कहां है जाता हुआ मॉनसून

उत्तराखंड में लैंडस्लाइड और बर्फबारी इसी वजह से हुई. चारधाम यात्रा मार्ग बाधित हो गए क्योंकि भारी बारिश और भूस्खलन ने सड़कों को नुकसान पहुँचाया. नेपाल में भी इसी सिस्टम के प्रभाव से भारी बारिश हुई और हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप पर एवलांच जैसी घटना घटी.

ओडिशा में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आई और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा. बिहार और उत्तर प्रदेश में खेतों में पानी भर गया तथा कई जगहों पर फसलों को नुकसान पहुंचा. उत्तराखंड में लैंडस्लाइड और बर्फबारी ने पर्यटन तथा तीर्थयात्रा को प्रभावित किया.

September rains India 2026
ओडिशा में भी कई जगहों पर बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. (Photo: PTI)

28-30 सितंबर इन इलाकों में बारिश की संभावना 

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और चंडीगढ़ जैसे एरियाों में भी 28 से 30 सितंबर के बीच पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश की संभावना जताई जा रही है. ये बारिशें सामान्य से अधिक तेज हो सकती हैं क्योंकि नमी की उपलब्धता पहले से बनी हुई है.

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत में 28 से 30 सितंबर तक बारिश हो सकती है. पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड का खतरा बना रह सकता है. अल-नीनो की मजबूत स्थिति आने वाले महीनों में भी बनी रहने की संभावना है, जिससे सर्दियों का मौसम प्रभावित हो सकता है. 

वैज्ञानिक दृष्टि से यह स्पष्ट है कि सितंबर की इस असामान्य बारिश का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन और उसके बाद बना लो-प्रेशर एरिया है, जिसने पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलकर नमी बढ़ाई. अल-नीनो ने मॉनसून को कमजोर किया, लेकिन स्थानीय सिस्टम सक्रिय रहे. 

जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे घटनाक्रम अधिक अनिश्चित और तीव्र होते जा रहे हैं. लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और पहाड़ी इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. यह घटनाक्रम हमें याद दिलाता है कि मौसम के सिस्टम जटिल होते हैं. एक अकेला कारण नहीं, बल्कि कई प्रणालियों के मिलने से ऐसे असामान्य मौसम पैदा होते हैं.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *