बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत वेतन सीमा (Wage limit) को ₹15000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने का बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस फैसले से देशभर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को राहत मिली है।
इसके साथ ही रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) एक बड़ा सहारा बनकर उभरती है। लेकिन EPF कवरेज के लिए बेसिक सैलरी की अधिकतम सीमा (wage ceiling) बढ़ने के बाद कर्मचारियों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि अगर उन्होंने 10 साल काम किया तो उन्हें कितनी पेंशन (Pension) मिलेगी और इसका हिसाब वे कैसे लगाएं।
कितनी मिलेगी पेंशन?
EPFO के अनुसार EPS पेंशन का फॉर्मूला है-
मासिक पेंशन = (पेंशनेबल सैलरी × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70
* पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary): आखिरी 60 महीनों के औसत वेतन के आधार पर।
* पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service): EPS में योगदान वाले कुल सालों की संख्या।
28000 सैलरी पर कितनी बनेगी पेंशन?
अब ये समझते हैं कि अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹28,000 है और आपका योगदान सीलिंग लिमिट से ऊपर असली सैलरी पर हो रहा है, तो पेंशन की गणना इस प्रकार होगी:
10 साल की नौकरी पर: (28,000 × 10) / 70 = ₹4000
यानी 10 साल की नौकरी पर आपको हर महीने लगभग ₹4,000 की गारंटीड पेंशन मिलेगी।
कंपनी का योगदान
आपकी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा PF में जाता है और उतना ही हिस्सा 12% कंपनी भी मिलाती है। कंपनी के 12% का बंटवारा कुछ इस तरह होता है:
1. 8.33% EPS फंड में जाता है: पुराने नियम में ₹15,000 की लिमिट पर कंपनी अधिकतम ₹1250 हर महीने आपके पेंशन फंड में डालती थी, लेकिन अब नए नियम के ₹25,000 की लिमट पर ₹2,088 आपके फंड में जमा होंगे।
2. 3.67% EPF खाते में जाता है।















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