मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त का राज्य 1.25 करोड़ महिलाओं को इंतजार है। रक्षाबंधन से पहले उन्हें यह सौगात मिल जाएगी। इसे लेकर लेटेस्ट जानकारी मिली है।

Ladli Behna Yojana 39 Kist
19 अगस्‍त को म‍िल सकती है लाडली बहना योजना की 39वीं क‍िस्‍त
मध्य प्रदेश की 1.25 करोड़ महिलाएं इस समय एक ही सवाल का जवाब जानना चाहती हैं। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 39वीं किस्त कब आएगी? अब इसे लेकर एक जरूरी अपडेट मिला है। इस बार मैहर जिले से मुख्यमंत्री मोहन यादव लाडली बहना योजना की 39वीं किस्त ट्रांसफर कर सकते हैं। अभी तक जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक 19 अगस्त महिलाओं के खाते में पैसा आ सकता है।

हालांकि अभी तक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। लेकिन मैहर जिले में मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिला कलेक्टर के ऑफिशियल एक्स हैंडल पर भी सीएम के प्रस्तावित दौरे के चलते व्यवस्थाओं की समीक्षा की बात कही गई है। आमतौर पर लाडली बहना योजना का पैसा हर महीने 15 तारीख से पहले ही आ जाता है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री मोहन यादव के कई कार्यक्रमों और स्वतंत्रता दिवस समारोह के चलते देरी हो रही है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि रक्षा बंधन के आसपास महिलाओं के खाते में यह पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है।

क्या इस बार भी मिलेगा रक्षा बंधन का शगुन

लाडली बहनों को हर साल रक्षाबंधन और भाई दूज के मौके पर योजना की सम्मान राशि के साथ 250 रुपये का शगुन अलग से मिलता रहा है। ऐसे में बहुत सी महिलाएं जानना चाहती हैं कि इस बार उन्हें 1500 रुपये मिलेंगे या 1750 रुपये? इस संबंध में यूं तो सरकार ने कोई भी अपडेट अभी तक नहीं दिया है। लेकिन संकेतों को मानें तो महिलाओं को 250 रुपये का शगुन अलग से नहीं मिलेगा।

पिछले साल भाई दूज पर महिलाओं की सम्मान राशि को 1250 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया था। तब भी अलग से 250 रुपये नहीं दिए गए थे। इस बार भी इसकी उम्मीद न के बराबर ही है।

तो क्या 19 अगस्त को खाते में आएंगे पैसे

मैहर के कलेक्टर की ओर से भी अभी मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे की तारीख का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन संभावना जताई जा रही है कि 19 अगस्त को मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना का पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं।

7 लाख से ज्यादा नाम कटे, कहीं आपका नाम भी तो नहीं शामिल

लाडली बहना योजना की 39वीं किस्त से पहले सरकार द्वारा लाभार्थियों के रिकॉर्ड की वेरिफिकेशन की खबरें भी सामने आ रही हैं। साथ ही जानकारी मिल रही है कि करीब 7 लाख नाम इस योजना से काटे जा चुके हैं। अगर आपको भी आशंका है कि कहीं आपका नाम तो नहीं कट गया तो आप पोर्टल पर जाकर ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ के जरिए अपने नाम को चेक कर सकती हैं। इसके अलावा अगर आपने अभी तक eKYC नहीं किया है तो आप उसे भी समग्र पोर्टल पर जाकर तुरंत करा लें।

अम‍ित कुमार

लेखक के बारे मेंअम‍ित कुमारअमित कुमार, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर/सीनियर जर्नलिस्ट हैं। वर्तमान में सरकारी योजना सेक्शन के जरिए आम जनता तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचा रहे हैं। अमित कुमार की प्राथमिकता भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हर सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर रीडर्स तक पहुंचाना है। अमित कुमार जनवरी, 2025 से नवभारत टाइम्स डिजिटल से जुड़े हैं। इसके साथ बिहार-झारखंड और राजस्थान टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वह NBT Digital में सरकारी योजनाओं, बिहार-झारखंड और राजस्थान से संबंधित सेक्शन की प्लानिंग से लेकर तथ्यों पर आधारित ऐसे लेख तैयार कर रहे हैं, जो रीडर्स तक काम की जानकारी बिना बढ़ा-चढ़ाकर आसान भाषा में पहुंचा सकें।खबरें बिना सनसनी फैलाए पाठकों तक पहुंचाने पर उनका फोकस है। इन राज्यों की सियासी नब्ज को टटोलने के साथ-साथ आम लोगों की जरूरत की खबरों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने 20 साल के करियर में अमित कुमार को पत्रकारिता जगत के अलग-अलग क्षेत्र में रिपोर्टिंग करने और आमजन के लिए उपयोगी खबरें लिखने का मौका मिला।अमित कुमार ने सितंबर, 2006 में खेल जगत में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत की। फिर देश के प्रमुख अखबारों से डिजिटल की दुनिया तक कई पड़ाव आए। इस दौरान नेशनल, इंटरनेशनल, देश के विभिन्न राज्यों की खबरों को लेकर न्यूज प्लानिंग, वैल्यू एडेड आर्टिकल्स, इन्फ्रोग्राफिक्स और स्पेशल दिनों के लिए कंटेंट तैयार करने का काम किया। अमित कुमार के करियर में भूमिकाएं तो कई बदलीं, लेकिन एक चीज स्थिर रही। आमजन के लिए उपयोगी खबरों को आसान से आसान भाषा में रीडर्स तक पहुंचाना।अपने करियर के दो दशक लंबे सफर के दौरान सटीक खबर, फैक्ट पर आधारित, इन-डेप्थ और नॉलेज से भरपूर कंटेंट रीडर्स तक पहुंचाना ही प्राथमिकता रही। उनका मानना है कि कोई भी जानकारी यूजर तक बिना वेरिफाई किए नहीं जानी चाहिए। इसलिए खबरों के लिए वह हमेशा ऑथेंटिक सोर्स पर भी भरोसा करते हैं।देश की राजधानी दिल्ली में ही जन्मे और पले-बढ़े अमित कुमार ने CBSE Board से 10वीं और 12वीं पास की। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही हिंदी भाषा में M.A. किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर संवारने की ख्वाहिश के चलते माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। अमित कुमार शुरू से ही कुछ नया सीखने को लेकर आतुर रहे हैं। यही चीज उनके 2 दशक लंबे करियर में भी झलकती है।पत्रकारिता जगत में 20 साल का अनुभवअमित कुमार नवभारतटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले 20 साल में अमित कुमार को अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नई दुनिया, जनसत्ता और हरिभूमि जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अपनी स्किल को संवारने का मौका मिला। 2019 में अमर उजाला के साथ डिजिटल का सफर शुरू किया। यहां नेशनल-इंटनेशनल खबरों पर इन-डेप्थ काम करते हुए सफर के अगले पड़ाव टीवी9 भारतवर्ष और न्यूज-24 बने। यहां न्यूज टीम को लीड किया।करियर के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2010, क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 और बैडमिंटन ओपन जैसे कई बड़े इवेंट्स में रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। देश-विदेश की बड़ी खबरों पर काम करते हुए अयोध्या राम मंदिर फैसला, लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव, बिहार और झारखंड विधानसभा चुनाव, बजट, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स कवर किए। अमित कुमार को पॉजिटिव इम्पैक्ट वाली स्टोरीज लिखना पसंद है। उनकी प्राथमिकता ऐसा कंटेंट लिखने की रहती है, जो लोगों के लिए मददगार साबित हों। अमित कुमार को लिखने और पढ़ने के साथ घूमने का शौक है। देश के छोटे-छोटे गांवों तक जाना वहां की जीवनशैली से रूबरू होना खासतौर से पसंद है।… और पढ़ें