Panchkula News:हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी को लोक प्राधिकरण मानने के आदेश पर रोक लगाई – High Court Stays Order Declaring Retired Judicial Officer A Public Authority


पंजाब राज्य सूचना आयोग के आदेश को हाईकोर्ट में दी गई है चुनौती

सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश भावनेश चंद गुप्ता ने दाखिल की है याचिका

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य सूचना आयोग के एक आदेश पर रोक लगाई है। आयोग ने सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश भावनेश चंद गुप्ता को आरटीआई अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण माना था। हाईकोर्ट ने सूचना आयोग और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

आयोग ने भावनेश चंद गुप्ता को आरटीआई आवेदक को 30 दिन में जानकारी देने का निर्देश दिया था। भावनेश चंद गुप्ता सेवानिवृत्ति के बाद पंजाब सरकार की ओर से विभागीय जांच अधिकारी के तौर पर नियुक्त होते रहे हैं। एक आरटीआई आवेदक ने 13 जुलाई 2023 को उनसे संबंधित विभागीय जांच की जानकारी मांगी थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि आरटीआई आवेदन उन्हें सीधे नहीं मिला था। शुरुआती कार्रवाई में भी उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया था। बाद में सूचना आयोग ने 3 अप्रैल 2025 को स्वत: संज्ञान लिया। आयोग ने उन्हें रिकॉर्ड के संरक्षक के रूप में पक्षकार बनाया। आयोग ने उन्हें आरटीआई अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण माना।

हाईकोर्ट में चुनौती :

पंजाब राज्य सूचना आयोग के इस आदेश को भावनेश चंद गुप्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने आयोग के आदेश को रद्द करने की मांग की। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश पर रोक लगाई है। अब संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।



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